राष्ट्रीय तानसेन सम्मान - वर्ष 2024

राष्ट्रीय तानसेन सम्मान - वर्ष 2025 के बारे में

पं. तरुण भट्टाचार्य (राष्ट्रीय तानसेन सम्मान 2025)

पण्डित तरुण भट्टाचार्य भारतीय शास्त्रीय संगीत के उन विरले कलाकारों में से हैं, जिन्होंने न केवल संतूर वाद्य को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि इसके स्वरूप, शैली और तकनीक में क्रांतिकारी परिवर्तन कर इसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 23 दिसम्बर 1957 को पश्चिम बंगाल में जन्मे पण्डित तरुण भट्टाचार्य प्रसिद्ध संतूर वादक एवं संगीतकार के रूप में विश्वभर में सम्मानित हैं। आपके पिता रबी भट्टाचार्य ने प्रारंभिक जीवन से ही आप में संगीत के प्रति अनुशासन, संस्कार और संवेदनशीलता का बीज बोया। एक संतूर विशेषज्ञ के रूप में आपने अपने पाँच दशकों से अधिक लंबे करियर में संतूर को विश्व मंच पर एक नई प्रतिष्ठा दिलाई है।
  • प्राचीन काल में शततंत्री वीणा के रूप में जाना जाने वाला यह वाद्य विदेशी आक्रमणों और समय की धुंध में अपनी मूल पहचान खो बैठा था, परंतु आपने इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में अद्भुत प्रयास किए। आपने संतूर को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए उसे आधुनिक तकनीक, नई सोच और अभिव्यक्ति के व्यापक रूपों से जोड़ा, जिससे यह वाद्य भारतीय शास्त्रीय संगीत के बड़े मंच पर अपनी चमक के साथ पुनः स्थापित हो सका। आपकी सबसे क्रांतिकारी उपलब्धियों में से एक है संतूर में मींड तकनीक का प्रयोग। संतूर की पारंपरिक संरचना में मींड देना लगभग असंभव माना जाता था, परंतु आपने अपने कौशल, अनुसंधान और समर्पण से यह संभव कर दिखाया। इससे संतूर अभिव्यक्ति के स्तर पर सितार जैसे वाद्यों के और निकट आ गया। इसी तरह मनकास या फाइन-ट्यूनर्स का आपका यह आविष्कार संतूर की ट्यूनिंग को तेज, स्थायी और अत्यन्त सटीक बनाता है, जिससे यह 100 तारों वाला वाद्य शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति में और अधिक प्रभावशाली बन सका।

  • आप सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि विद्वान, रचनाकार और नवोन्मेषी संगीतकार भी हैं। स्वच्छ गंगा अभियान से प्रेरित होकर 'राग गंगा' की रचना की, जिसे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रारंभ किए गए इस अभियान से प्रेरित होकर बनाया गया। इसके अलावा 'राग त्रिवेणी' जैसी आपकी रचनाएँ भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक नया अध्याय जोड़ती हैं। आपका सामाजिक योगदान उतना ही विस्तृत और संवेदनशील है जितना आपका संगीत। थैलेसीमिया जागरूकता के लिए कई अभियान चलाए और लोगों को इस आनुवंशिक बीमारी के बारे में जागरूक किया। नियमित जांच, प्रारंभिक पहचान और उचित इलाज के महत्व को उजागर करते हुए सैकड़ों परिवारों को सहायता और समर्थन प्रदान किया। साथ ही एण्ड पोलियो अभियान में रोटरी इंटरनेशनल के साथ जुड़कर पोलियो उन्मूलन के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाई। आपकी भागीदारी ने न केवल जागरूकता बढ़ाई बल्कि धन-संग्रह के कार्यक्रमों के जरिए अनगिनत बच्चों को इस बीमारी से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • अमेरिका के 15 शहरों में शंकरा आई फाउंडेशन के लिए आयोजित 'विजन-2020' फण्ड रेजिंग संगीत कार्यक्रमों ने टाली जा सकने वाली अंधता के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए एकत्रित धन से हजारों जरूरतमंदों को निःशुल्क नेत्र चिकित्सा उपलब्ध करवाई, साथ ही नेत्रदान अभियान को भी मजबूती दी। संगीत के क्षेत्र में आपका परमार्थिक योगदान 'संतूर आश्रम' के रूप में दिखाई देता है, जहाँ वंचित बच्चों को निःशुल्क संगीत-शिक्षा देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिभाओं को संवारा जाता है। पण्डित भट्टाचार्य द्वारा संचालित गुरुकुल, कार्यशालाएँ और विभिन्न संगीत कार्यक्रम हजारों युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनकर उन्हें प्रमुख मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुए हैं।

  • आप गुरु-शिष्य परम्परा के सच्चे संरक्षक और संवाहक हैं। विश्वभर के प्रतिष्ठित मंचों जैसे रॉयल अल्बर्ट हॉल, ब्रसेल्स के पैलेस-दे-बॉ, फ्रांस के थिएटर-दे-ला-विल, स्पेन के अपोलो थिएटर, कनाडा के जुबिली ऑडिटोरियम और रूस के क्रेमलिन पर आपके प्रदर्शन गूँज चुके हैं। पाँच दशकों में रिकॉर्ड किए गए आपके 200 से अधिक एल.पी., कैसेट्स और सीडी संतूर की समृद्ध परम्परा का दस्तावेज बन चुके हैं। आपकी प्रतिष्ठित सीडी 'किरवानी' को विश्व के शीर्ष दस संगीत संग्रहों में स्थान मिला है, जो आपकी कला व मौलिकता की श्रेष्ठता का परिचायक है।

  • आप भारत के ग्लोबल म्यूजिक एम्बेसडर के रूप में सम्मानित हैं और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हैं। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रदान किया गया 'संगीत महासम्मान' भी आपकी कला-साधना की विरलता को प्रमाणित करता है। संतूर के प्रति आपका योगदान अद्वितीय है।

  • मध्यप्रदेश शासन पण्डित तरुण भट्टाचार्य को संतूर वादन के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना, गहन प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट सर्जनात्मक अभिव्यक्ति के साथ हिन्दुस्तानी संगीत की धरोहर को नयी पीढ़ी में उदारतापूर्वक सम्प्रेषित करने के लिए राष्ट्रीय तानसेन सम्मान वर्ष 2025 से सादर विभूषित करता है।