राष्ट्रीय तानसेन सम्मान - वर्ष 2024

राष्ट्रीय तानसेन सम्मान - वर्ष 2024 के बारे में

पं. राजा काले ,मुंबई (राष्ट्रीय तानसेन सम्मान 2024)

पण्डित राजाराम उर्फ राजा काले एक भारतीय गायक, संगीतकार, शास्त्रीय, उप-शास्त्रीय और भक्ति संगीत के विद्वान हैं। पण्डित राजा काले ऐसे अद्वितीय कलाकार हैं, जिन्होंने संगीत की मूल आत्मा को समझते हुए उसे अपने गहन अभ्यास, मौलिकता और समर्पण के माध्यम से नए आयाम प्रदान किए हैं। संगीत आपके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि एक सतत साधना है, जिसे आप अपने जीवन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण धरा मानते हैं। इसी कारण आपका गायन, आपकी शैली और आपकी भाव परकता श्रोताओं को एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।
  • आपका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहाँ संगीत ही जीवन की धुरी था। आपके पिता पण्डित प्रभाकरराव काले, स्वयं एक गहरे अध्ययनशील और साधनापरक कलाकार थे। उन्हीं से बाल्यावस्था में पं. राजा काले ने संगीत की प्रथम दीक्षा प्राप्त की। आगे चलकर आपको पं. उत्तमराव अग्निहोत्री का संरक्षण मिला, जिसने आपकी गायकी में अनुशासन और सौंदर्यबोध का संपुष्ट आधार तैयार किया। इसके बाद आपके जीवन में प्रवेश हुआ महान संगीतकार और शास्त्रीय तथा उपशास्त्रीय संगीत के तेजस्वी हस्ताक्षर पण्डित जितेंद्र अभिषेकी का। पण्डित सी.पी. रेले, पण्डित के. जी. गिंडे एवं पण्डित बालासाहेब पूछवाले जैसे दिग्गज गुरुओं की शिक्षाओं से आपके संगीत में विविधता, विस्तार और परम्परा का दृढ़ सम्मिश्रण विकसित हुआ।

  • आपने वर्ष 1990 में 'ख्याल में बंदिशों के महत्व' विषय में पीएच. डी. प्राप्त की। इस शोध में आपने पारंपरिक, मध्यकालीन और आधुनिक संगीतकारों की बंदिशों का विस्तृत विश्लेषण किया तथा उनके सौंदर्य, संरचना और भावगत प्रभाव पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया। आगे चलकर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने आपकी विद्वता को पहचानते हुए आपको 'पं. भीमसेन जोशी, पं. कुमार गंधर्व, पं. जितेंद्र अभिषेकी एवं पं. जसराज के गायन का तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर सीनियर फैलोशिप प्रदान की। आपके अध्ययन ने आपकी गायकी को न केवल गहराई दी, बल्कि प्रस्तुतियों में एक विशिष्ट परिपक्वता और विचारपूर्ण दृष्टि भी प्रदान की। आप बंदिशों को उनके मूल स्वरूप में रखते हुए भी उनमें आत्मीयता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का सुंदर रंग घोल देते हैं, जो आपके संगीत की विशिष्ट पहचान है।

  • आपकी गायकी में सहजता, गहन भाव, अभिव्यक्ति और रागों की सूक्ष्म संरचना का अद्भुत संतुलन है। ख्याल, ठुमरी, दादरा, टप्पा, भजन, नाट्य-संगीत और भावगीत हर शैली में आपका स्वाभाविक अधिकार दिखाई देता है। रागों की प्रस्तुति में आप न केवल परम्परा का पालन करते हैं, बल्कि उसमें अपनी विशिष्टता और कलात्मकता भी जोड़ते हैं, जिसके कारण आपका हर कार्यक्रम एक नई अनुभूति बन जाता है। आपकी प्रस्तुतियाँ देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर गूँज चुकी हैं, जिनमें तानसेन समारोह, स्वामी गंधर्व महोत्सव, पं. पालुस्कर स्मृति समारोह इत्यादि प्रमुख हैं। आप वर्ष 2000 में अमेरिका के 12 प्रमुख शहरों में अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर भी आपके अनेकों कार्यक्रम प्रसारित हो चुके हैं, जिन्होंने संगीत रसिकों के हृदयों में अमिट छाप अंकित की है।

  • आपकी पहचान केवल परंपरागत प्रस्तुतियों तक ही सीमित नहीं है, आप अपने विशिष्ट एवं अत्यन्त सृजनात्मक थीम आधारित कार्यक्रमों के लिए भी उतने ही विख्यात हैं। 'अभंग वर्षा' में आपने महाराष्ट्र की संत परम्परा के अभंगों को नई उड़ान दी। 'सगुण-निर्गुण' में भारतीय भक्ति-धारा के दोनों स्वरूपों-साकार और निराकार को एक साथ जोड़कर उसकी आध्यात्मिक अनुभूति को श्रोताओं तक पहुँचाया। 'अविस्मरणीय अभिषेकी' आपके गुरु पं. जितेंद्र अभिषेकी को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है, जिसमें गुरु के संगीत की आत्मा को पुनः जीवंत किया है।' चतुरंग' में चार महान गायकों पं. भीमसेन जोशी, पं. कुमार गंधर्व, पं. जसराज और पं. जितेंद्र अभिषेकी की गायकी का सार संगीतबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं 'प्रेमरंग' में आपने प्रेम-प्रधान कविताओं को मधुर धुनों में पिरोकर गीतों को उच्च सौंदर्य स्तर तक पहुँचाया है।

  • पं. राजा काले ने अपने संगीत को विभिन्न एलबमों के माध्यम से भी सहज और व्यापक रूप दिया है। HMV का 'राग सरिता', पेन म्यूजिक का 'सीजन्स', प्रथमेश आर्ट्स का 'बंदिश' आदि आपके लोकप्रिय एलबम में से हैं। आपकी प्रतिभा और कलात्मकता को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें पं. भीमसेन जोशी द्वारा प्रदान किया गया वत्सलबाई जोशी पुरस्कार आपके संगीत-विरासत की ऊँचाइयों का प्रमाण है।

  • मध्यप्रदेश शासन पण्डित राजा काले को ख्याल गायन के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना, गहन प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट सर्जनात्मक अभिव्यक्ति के साथ शास्त्रीय संगीत की धरोहर को नयी पीढ़ी में उदारतापूर्वक सम्प्रेषित करने के लिए राष्ट्रीय तानसेन सम्मान वर्ष 2024 से सादर विभूषित करता है।